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ज़ियारत-ए-नाहिया मुक़द्दसा (Ziyarat e Nahiya) इस्लामी इतिहास और विशेष रूप से शिया संप्रदाय में एक बेहद दर्दनाक, रूहानी और महत्वपूर्ण दुआ (प्रार्थना) है। यह ज़ियारत कर्बला के शहीदों, विशेषकर इमाम हुसैन (अ०स०) की शहादत और उनके बलिदान को याद करने का एक सशक्त माध्यम है। हिंदी भाषी क्षेत्रों में इस ज़ियारत को पढ़ने, समझने और इसके अर्थ को महसूस करने वाले अज़ादारों (शोक मनाने वालों) की एक बड़ी संख्या है।
For Hindi speakers, the Ziyarat is often available in two formats: Hindi Transliteration (reading Arabic words in Hindi script) and Hindi Translation (understanding the meaning). 1. Example of Salutation (Hindi Transliteration): ziyarat e nahiya in hindi
मान्यता के अनुसार, यह ज़ियारत इमाम महदी (अ.स.) ने स्वयं अपने "विशेष प्रतिनिधियों" (नायब-ए-खास) में से एक, जो उनके ग़ैबत-ए-सुग़रा (छोटी अनुपस्थिति) के समय में नियुक्त किए गए थे, के माध्यम से भेजी थी। यह परंपरा शेख मुफीद (र.अ.) और सैय्यद मुर्तज़ा (र.अ.) जैसे विद्वानों तक पहुंची, और फिर उनसे होते हुए इब्नुल-मश्हदी और अल्लामा मजलिसी (र.अ.) जैसे विद्वानों तक पहुंची। यह लगातार चली आ रही प्रामाणिक श्रृंखला (सनद) इस ज़ियारत की विश्वसनीयता का एक बड़ा प्रमाण है। ziyarat e nahiya in hindi
ज़ियारत-ए-नाहिया की कुछ प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं: सलाम और सम्मान: ziyarat e nahiya in hindi