नाम, रूप और ध्यान की सीमाओं से परे जाने का उपदेश।
'अवधूत' का अर्थ है वह जिसने समस्त सांसारिक बंधनों, शास्त्र-नियमों और द्वैत भाव को 'धो' दिया है। अवधूत गीता साक्षात् के मुख से निकली वाणी मानी जाती है। यह ग्रंथ 'अद्वैत' (Non-duality) की पराकाष्ठा है। जहाँ भगवद गीता कर्म और भक्ति की बात करती है, वहीं अवधूत गीता सीधे उस अवस्था की चर्चा करती है जहाँ न कोई गुरु है, न शिष्य, न पुण्य है, न पाप। avadhuta gita pdf hindi
: Dattatreya describes the Self as "formless, all-pervading, and like the sky." He famously asks, "How can I bow to my own Self?"—highlighting that in the state of absolute oneness, even the act of worship implies a separation that no longer exists. न पुण्य है
यह ग्रंथ उन साधकों के लिए है जो ज्ञान मार्ग की अंतिम सीढ़ी पर हैं और माया के अंतिम भ्रम को भी छिन्न-भिन्न कर देना चाहते हैं। avadhuta gita pdf hindi
सहज अवस्था (स्वाभाविक स्थिति) का निरूपण।
ईश्वरानुग्रहादेव पुंसामद्वैतवासना। महद्भयपरित्राणाद्विप्राणामुपजायते॥